ज्योतिष में जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली देखी जाती है, तो केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि कौन-सा ग्रह किस भाव में बैठा है। ग्रह की राशि, भाव, दृष्टि, युति, बल और उसकी गति जैसी कई बातें मिलकर उसके फल को समझने में मदद करती हैं। इसी क्रम में वक्री ग्रह भी एक…
उपचय भाव: समय के साथ कैसे बदलते हैं इनके फल?
वैदिक ज्योतिष में कुंडली के हर भाव का अपना एक विशेष महत्व होता है। कुछ भाव जीवन की ऐसी परिस्थितियों को दर्शाते हैं जो व्यक्ति को जन्म से ही प्रभावित करती हैं, जबकि कुछ भाव ऐसे होते हैं जिनसे जुड़े विषय समय, अनुभव और लगातार किए गए प्रयासों के साथ धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इन्हीं…
नीचभंग राजयोग क्या है? कुंडली में इसके बनने के नियम और प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में किसी ग्रह का नीच राशि में होना सामान्यतः उसकी शक्ति में कमी से जोड़ा जाता है। लेकिन हर नीच ग्रह जीवन में केवल कठिनाई ही दे, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ विशेष परिस्थितियों में उस ग्रह की नीच स्थिति का प्रभाव कम या समाप्त हो सकता है। जब यह स्थिति विशेष ज्योतिषीय…
केमद्रुम दोष क्या होता है और इसका असर जीवन पर कैसे पड़ता है?
कुंडली में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति, माता, सुख-सुविधाओं और व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रिया से जोड़ा जाता है। इसलिए जब चंद्रमा की स्थिति कमजोर या चुनौतीपूर्ण दिखाई देती है, तो उसका असर व्यक्ति के जीवन के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। इन्हीं स्थितियों में केमद्रुम दोष का नाम भी लिया जाता…
Venus Combustion in Vedic Astrology: Its Effects on Different Areas of Life
In Vedic astrology, every planet has a particular role to play in a birth chart. Venus is generally associated with love, beauty, relationships, comforts, luxury, creativity, artistic abilities, pleasures and the finer things in life. It also represents our ability to appreciate beauty, maintain harmony and enjoy material comforts. When Venus comes very close to…
सितंबर 2026 मासिक राशिफल: करियर, धन, प्रेम और स्वास्थ्य के लिए कैसा रहेगा यह महीना?
सितंबर 2026 कई मायनों में महत्वपूर्ण महीना रहने वाला है। इस महीने ग्रहों की स्थिति में एक के बाद एक बदलाव देखने को मिलेंगे, जिनका प्रभाव अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। विशेष रूप से बुध, शुक्र, सूर्य और मंगल के राशि परिवर्तन के कारण महीने के अलग-अलग हिस्सों में जीवन के…
धर्म-कर्माधिपति योग कब बनता है? जानें कुंडली में इसका महत्व
धर्म-कर्माधिपति योग क्या होता है? वैदिक ज्योतिष में कुंडली के 9वें और 10वें भाव को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। 9वां भाव भाग्य, धर्म, गुरु, पिता, उच्च शिक्षा और जीवन में मिलने वाले मार्गदर्शन से जुड़ा होता है, जबकि 10वां भाव कर्म, नौकरी, व्यवसाय, पद, प्रतिष्ठा और सामाजिक पहचान को दर्शाता है। जब इन दोनों…
कुंडली में बुध-आदित्य योग: कब बनता है और क्या फल देता है?
वैदिक ज्योतिष में अनेक ऐसे शुभ योग बताए गए हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व, बुद्धि, करियर और जीवन की दिशा को प्रभावित करते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण योग बुध-आदित्य योग है। सामान्यतः इसे बुद्धिमत्ता, वाक्पटुता, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक योग्यता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, केवल सूर्य और बुध की युति देखकर…
Papakartari Yoga: What It Really Means in a Birth Chart
Among the many yogas described in Vedic astrology, Papakartari Yoga is often surrounded by fear and misunderstanding. It is frequently labelled as an entirely negative yoga, leading many people to believe that its presence in a birth chart guarantees obstacles, suffering, or failure. In reality, that is far from the truth. Like most astrological combinations,…
लक्ष्मी योग: कुंडली में कब बनता है और क्या फल देता है?
वैदिक ज्योतिष में कुछ ऐसे शुभ योग बताए गए हैं जो व्यक्ति के जीवन में धन, सम्मान, सुख और समृद्धि लेकर आते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण योग लक्ष्मी योग माना जाता है। नाम से ही स्पष्ट है कि यह योग धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि,…










